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कà¥à¤¯à¤¾ शिशॠका अकà¥à¤¸à¤° हिचकी लेते रहना सामानà¥à¤¯ है?
हां। à¤à¤• साल से कम उमà¥à¤° के शिशॠका हिचकियां लेना काफी आम हैं। यहां तक कि आपने गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान गरà¥à¤ में पल रहे शिशॠकी हिचकियां à¤à¥€ महसूस की होंगी।
शिशॠको दूध पीने के बाद हिचकियां आ सकती है और हिचकी के साथ थोड़ा दूध à¤à¥€ बाहर आ सकता है। इसकी वजह शायद रिफà¥à¤²à¤•à¥à¤¸ हो सकता है, मगर इससे उसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ परेशानी नहीं होनी चाहिà¤à¥¤
शिशà¥à¤“ं को रिफà¥à¤²à¤•à¥à¤¸ इसलिठहोता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि à¤à¥‹à¤œà¤¨ नलिका के छोर पर मासपेशीय वैलà¥à¤µ अà¤à¥€ पूरी तरह विकसित नहीं हà¥à¤† होता। यह à¤à¥‹à¤œà¤¨ को पेट में बनाठरखने का काम करता है। वैलà¥à¤µ के विकसित न होने का मतलब है कि जब शिशॠका पेट à¤à¤°à¤¾ होगा, तो à¤à¥‹à¤œà¤¨ और अमà¥à¤² (à¤à¤¸à¤¿à¤¡) ऊपर की तरफ आ सकते हैं। इसकी वजह से उसे हिचकी आ सकती है और थोड़ी मातà¥à¤°à¤¾ में दूध à¤à¥€ निकल सकता है (पोसेटिंग)।
यदि शिशॠको गंà¤à¥€à¤° रिफà¥à¤²à¤•à¥à¤¸ हो तो, उसे उलà¥à¤Ÿà¥€ à¤à¥€ हो सकती है। धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें कि हिचकियां, रिफà¥à¤²à¤•à¥à¤¸ के बिना à¤à¥€ हो सकती हैं, और रिफà¥à¤²à¤•à¥à¤¸ हिचकियों के बिना à¤à¥€ हो सकता है।
रिफà¥à¤²à¤•à¥à¤¸ होना सामानà¥à¤¯ है और जब तक आपका शिशॠसà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ दिख रहा हो, चिंता की कोई बात नहीं होती। फॉरà¥à¤®à¥‚ला दूध पीने वाले और सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करने वाले दोनों ही शिशà¥à¤“ं को रिफà¥à¤²à¤•à¥à¤¸ हो सकता है। आप बस सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ करें कि हर बार दूध पिलाने के बाद आपके पास तौलिया, नैपकिन, टिशà¥à¤¯à¥‚ या मलमल का कपड़ा हाथ में जरà¥à¤° हो।
आपको शायद नीचे बताठगठउपाय शिशॠकी हिचकियां रोकने में मददगार लगें:
कोशिश करें कि आप शिशॠको जितना संà¤à¤µ हो सीधी अवसà¥à¤¥à¤¾ में लेकर दूध पिलाà¤à¤‚।
हर बार सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के बाद शिशॠको 20 मिनट तक सीधा ही पकड़े रहें।
शिशॠको कम मातà¥à¤°à¤¾ में मगर जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बार दूध पिलाà¤à¤‚।
यदि आप शिशॠको बोतल से दूध पिलाती हैं, तो दूध पिलाने के दौरान शिशॠको हर दो से तीन मिनट में डकार दिलवाती रहें।
शिशॠको आराम दिलाà¤à¤‚। शांतिदायक आवाजें निकालें, उसकी पीठमलें धीरे-धीरे हिला-डà¥à¤²à¤¾à¤à¤‚ या लोरी गाकर सà¥à¤¨à¤¾à¤à¤‚। इससे शायद उसे शांत रहने में मदद मिलेगी, खासकर यदि वह हिचकियों से परेशान हो रहा हो तो।
यह à¤à¥€ सच है कि हिचकियों को लेकर पीढ़ियों से कई मिथक जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ हà¥à¤ हैं। कà¥à¤› का मानना है कि शिशà¥à¤“ं को हिचकियां इसलिठआती हैं, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि कोई उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ याद कर रहा होता है। वहीं कà¥à¤› लोगों का मानना है कि हिचकियां आना शिशॠको गैस या उदरशूल (कॉलिक) होने का संकेत है। इसके अलावा कà¥à¤› ये मानते हैं कि हिचकियों का मतलब है शिशॠकी à¤à¥‚ख बढ़ रही है।
परिवार के सदसà¥à¤¯ या फिर शिशॠकी मालिशवाली हिचकियां रोकने के लिठशिशॠके मà¥à¤‚ह में हवा फूंकने या उसे चीनी का पानी या शहद खिलाने जैसे तरीके बता सकती हैं। कà¥à¤› तो शिशॠकी जीठखींचने, उसे अचानक से चौंका देने, तेज आवाजें निकालने, जोर से ताली बजाने या फिर सिर या पीठपर जोर से थपकी देने की सलाह देते हैं।
इस बात के कोई पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£ नहीं है, कि ये उपाय काम करते हैं। बलà¥à¤•ि इनसे शिशॠको चोट पहà¥à¤‚च सकती है।
यदि हिचकियों से शिशॠको परेशानी हो रही हो, तो आप उसका धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ à¤à¤Ÿà¤•ाने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ करें। हिचकियां अंतत: अपने आप बंद हो ही जाà¤à¤‚गी। यदि आप शिशॠकी हिचकियों या रिफà¥à¤²à¤•à¥à¤¸ को लेकर चिंतित हैं या फिर नींद के दौरान शिशॠको नियमित तौर पर हिचकियां आती हों, तो अपने डॉकà¥à¤Ÿà¤° से बात करें।
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